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प्रतीक्षा कृष्ण की

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कुछ चूहे
कुतर रहे हैं
देश का नक्शा
हम
कर रहे हैं
गणपति वंदन
कुछ बंदर
उजाड रहे हैं
देश की बगिया
हम
गा रहे हैं
हनुमान चालीसा
कुछ विषधर
उगल रहे हैं
लगातार जहर
हम
डूबे हुए हैं
नागपंचमी उत्सव में
बढती ही जा रही है
कौरवों की संख्या
हम
आंखे बंद करके
कर रहे हैं
कन्हैया की पूजा
आखिर
कौन
निभाएगा
कृष्ण का धर्म
कब रची जाएगी
नई गीता
डा मनोज रस्तोगी
DR.MANOJ RASTOGI
8,JEELAL STREET
MORADABAD-244001
U.P.
mob-9456687822



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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Akihilesh Chandra Srivastava के द्वारा
January 1, 2015

रस्तोगी जी हिम्मत न हरिये बिसारिये न राम…..कृष्ण हरयुग में आते है वे तो आयेंगेही पर हम सब को भी किनारे बैठकर तमाशा देखने के बजाय उनकी सेना बनने का प्रयास करना होगा यह देश देशभक्तों   से भरा पड़ा है   पर   वे सामने नहीं आते जो आते हैं  वे स्वार्थी लोग केवल अपने बारेमें सोंचनेवालेआत्मकेंद्रितलोगहैयातमाशबीन इसीलिए हमारे देश की यह दुर्दशा है

Bhola nath Pal के द्वारा
December 29, 2014

बहुमुखी संवेदना को सुन्दर भाव ,सुन्दर शव्दों की सौगात दी है आपने i दिल करता है आपको रोज पढूं i ह्रदय से आभार …..

Ravindra K Kapoor के द्वारा
November 1, 2014

मनोजजी इस छोटी सी 5 Star कविता में तो आपने भारत की गतिहीनता को बनाये रखने वाली उस रुग को ही पकड़ लिया जिसके कारण हम कहते तो बहुत कुछ हैं पर करते वो हैं जो हमें आगे नहीं बढ़ने देती. इस सुन्दर रचना के लिए आपको साधुवाद. सुभकामनाओं के साथ ….रवीन्द्र के कपूर

rameshagarwal के द्वारा
August 28, 2014

जय श्री राम देश को मार्गदर्शन करने,पंकजन्य शंख, बहाने, सोहे हुए हिन्दुओं को जगाने के लिए एक कृष्णा की तलाश है.मोदीजी हमारे कृष्णा बन कर आये हैं. यदपि सेक्युलर ब्रिगेड और न्यूज़ ट्रेडर्स के नाम के कौरव बढ़ रहे हैं लेकिन यदि मोदीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सोच वाले भारतीय एक झूट हो जाये कोई शक्ति विश्व की अमे परास्त नहीं कर सकती जरूरत है आत्मविश्वाश बढ़ाने की.

Sandeep KumarMandal के द्वारा
May 10, 2014

माननीय रस्तोगी जी, आपकी कविता वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में बिल्कुल सटीक है . किन्तु हमारी आदत है हम समस्या दिखाते हैं ,समाधान नहीं ढुढते.यदि समाधान हो तो अवश्य सुझाएं.

ikshit के द्वारा
January 17, 2014

श्रीमान जी… सच में आज एक नयी गीता की जरूरत है… हम आप के साथ हैं… कलम में तलवार है… और हम मिल कर वार करें गे ! – इच्छित

    डा.मनोज रस्तोगी,मुरादाबाद के द्वारा
    February 26, 2015

    बहुत बहुत धन्यवाद।

nirmalasinghgaur के द्वारा
November 18, 2013

 एक ऐसी  प्रभाव शाली रचना जो भगवान के बारे में , देश के बारे में और स्वम के बारे में  सोचने को मजबूर कर दे. बहुत बधाई रस्तोगी जी . सादर , निर्मला सिंह गौर

    डा. मनोज रस्तोगी के द्वारा
    July 31, 2014

    बहुत-बहुत आभार

udayraj के द्वारा
August 28, 2013

जन्मतअष्टअमी की हार्दिक शुभ कामनाएं । इस महापर्व पर एक विशेष कविता जो आपने हम पाठको को दी, आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

Santlal Karun के द्वारा
August 23, 2013

आदरणीय रस्तोगी जी, बड़े ही अर्थवान चित्र के साथ, अत्यंत सारगर्भित लाघुकायिक कविता, किन्तु अत्यंत प्रभावपूर्ण; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! … “आखिर कौन निभाएगा कृष्ण का धर्म कब रची जाएगी नई गीता |”

Dinesh के द्वारा
August 22, 2013

Very well Said sir G…….

udayraj के द्वारा
August 21, 2013

चिंगारी सुलगी है तो वो दिन भी आएगा , जिस दिन की हमें , समाज को, देश को , बेसब्ररी से इंतजार है … आग लगेगी जरुर लगेगी देर या सबेर । लोग जगेगें -उदयराज़

    डॉ. मनोज रस्तोगी के द्वारा
    August 21, 2013

    उदयराज़ जी , समाज में निशिचित रूप से चेतना आएगी । इसका हम सभी को इंतजार है ।

sanjeev singh के द्वारा
August 20, 2013

bahatreen….desh kae moujuda halat aur rajneetik vyastha pr teekha kataksh……..

sanjeev singh के द्वारा
August 20, 2013

Behatreen desh ke moujuda halat aur rajneetik vyastha pr teekha kataksh………..

kavya Rastogi के द्वारा
August 20, 2013

वास्तविकता से अवगत करने वाली एक छोटी परन्तु सार्थक रचना . ऐसी दायित्व प्रदर्शक कवितायेँ मानव को आत्मबोध कराती हैं और ऐसा ही कोई बोध नयी गीता की संरचना में सहायक सिद्ध हो सकता है. एक लम्बे अन्तराल के बाद इस गागर में सागर रचना के लिए मेरी शुभकामनाएं स्वीकारें.

    डॉ. मनोज रस्तोगी के द्वारा
    August 21, 2013

    काव्य जी , आपको कविता पसंद आई । बहुत बहुत धन्यवाद ।




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