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इंसानियत हो गई है, शर्मसार दिल्ली में।।

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इज्जत हो रही है, तार-तार दिल्ली में ।
रोज हो रहे हैं, बलात्कार दिल्ली में ।।

खुंद ही कीजिएगा, यहां अपनी हिफाजत।
गहरी नींद में हैं, पहरेदार दिल्ली में ।।

किस तरह आजकल, बढने लगी हैवानियत।
इंसानियत हो गई है, शर्मसार दिल्ली में।।

’एक्शन’ के साबुन से धो, कर लेंगे साफ ।
वर्दी जो हो गई है, दागदार दिल्ली में ।।

चीखने-चिल्लाने का कोई, नहीं होगा असर।
गूंगी-बहरी हो गई है, सरकार दिल्ली में।।

लुटेरों पर चढा हुआ है, रंग सियासत का।
क्या करेगा अब बेचारा, थानेदार दिल्ली में।।

न तो यह गिरेगी, ना होगी टस से मस।
कुर्सी सत्ता की बडी है, जानदार दिल्ली में।।

बढने लगी है रोज, टीआरपी चैनलों की।
जमकर बिक रहे हैं, अखबार दिल्ली में ।।

डा मनोज रस्तोगी
8, जीलाल स्टीट
मुरादाबाद -244001
उत्तर प्रदेश



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tariq Masued के द्वारा
January 19, 2014

Really it is heart touching. Congratulations !

udayraj के द्वारा
August 31, 2013

पश्चिमी देशों के अंधानुकरण का ही फल है कि आज हमारी संस्कृहति तार तार हो रही है । अपनी सभ्यता और संस्कृति को धत्ता बताकर हम जिस विकास की बात करते हैं यही वह सच है ।

udayraj के द्वारा
August 21, 2013

दिल्ली आज तू खामोश हो गर्ई जिस पे नाज देश को था राजधानी । तुझे लूट रहे दानत मानवी तु हो गई आज क्यों पानी पानी ।। उदयराज़

rajendra teotia के द्वारा
June 30, 2013

मनोज जी आप ने यथार्थ लिखा है आप को धन्यवाद देना तो बनता है

Sunil Rana के द्वारा
June 16, 2013

बहुत खूब डॉक्टर साहब बहतरीन व्यंग्यात्मक रचना है ,सामाजिक मुद्दों पर इस तरह की रचनाएं प्रस्तुत कर निश्चित ही आपने अपने मानव धेर्म का पालन किया है , बधाई स्वीकार करें ….

vilas raj के द्वारा
June 4, 2013

love this one

RITU RAI के द्वारा
May 10, 2013

बहुत सुन्दर प्रस्तुति अंकल जी अब बदल ले जनता अपना व्यहवार दिल्ली में सरकार हो गयी है बेलगाम दिल्ली में दिल तो बेच आये सरकार इटली में क्या रहेगा दिल अब की दिल्ली में

Dinesh के द्वारा
May 6, 2013

very nic Manoj Ji

kshitij rastogi के द्वारा
May 2, 2013

wonderful

ANVITA के द्वारा
May 2, 2013

BEHATREEN, BADHAI

CHANDAN KUMAR के द्वारा
May 2, 2013

Dear Manoj G, What a massage you have given through few wonderful words, Now it has become big pain for all of us to lead with family life in Delhi like city (Capital/Metropolitan). As such incidents taking place in HINDUSTAN, now i feel like we are in PORNISTAN. Thanks.

    डॉ. मनोज रस्तोगी के द्वारा
    May 3, 2013

    सही कहा आपने चंदन जी, सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा । इस पर युवा शक्ति को गंभीरता से सोचना होगा। प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार ।

shiv gupta के द्वारा
May 2, 2013

बहुत बढ़िया, बहुत खूब लिखा है।

kavya के द्वारा
May 2, 2013

दिल को छूने वाला लेख ! अति उत्तम , बधाई !

    डॉ. मनोज रस्तोगी के द्वारा
    May 3, 2013

    आपको गजल अच्छी लगी । इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार

manojvishu के द्वारा
April 30, 2013

बहुत खुब मनॊज जी अापने  सत्य लिखा 

yatindrapandey के द्वारा
April 29, 2013

हैलो सर सत्य वचन पर किसी के कान पर जू रेंगे तब बात बने

nishamittal के द्वारा
April 27, 2013

आदरनीय रस्तोगी जी खून में उबाल आ जाय तो शायद ऐसी स्थिति न आये,परन्तु ऐसी रचनाएं ,आलेख कुछ जोश भर सकें,बहुत प्रभावी रचना .बधाई




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