blogid : 3327 postid : 209

...वाड्रा हो गए मालामाल

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सब गोलमाल है गोलमाल।
कैसे सुनाएं देश का हाल।।

हर किसी के मन में भइया ।
उठ रहा है एक सवाल ।।

तीन साल में रॉबर्ट वाड्रा ।
कैसे हो गए मालामाल ।।

किसमें हिम्मत, जो जांच करे।
सत्ता बन गई है उनकी ढाल।।

चुप क्यों हो, कुछ तो बोलो।
पूछ रहे हैं केजरीवाल ।।

असर नहीं होगा हम पर ।
कितनी कर लो तुम हड़ताल।।

हम तो हो गए घड़े चिकने ।
मोटी हो गई अपनी खाल ।।

कुर्सी मिलते ही बदले रंग।
बदल गई है उनकी चाल।।

सत्ता का स्वाद चखने को ।
टपक रही है सबकी राल।।

मत पालो इन जोंको को ।
चूसेंगी खून ये पांच साल।।

बज रहा बिगुल बगावत का ।
देखो,अब जलने लगी मशाल ।।

गेहूं सड़ रहा बोरों में बंद ।
घर में पड़ रहा है अकाल।।

क्यों भर रहे इतनी दौलत ।
जब इक दिन आना है काल।।

एक शेर और ………,,.,

किसानोँ की जमीन और पानी का ।
गडकरी जी कर रहे हैँ इस्तेमाल ।।

डा. मनोज रस्तोगी
8, जीलाल स्ट्रीट
मुरादाबाद-244001
उत्तर प्रदेश



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (19 votes, average: 4.68 out of 5)
Loading ... Loading ...

18 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 29, 2014

रोबर्ट जी क्यों न हों मालामाल वह दामाद किसके है सुन्दर व्यंग | शोभा

Sushma Gupta के द्वारा
November 22, 2012

आदरणीय रस्तौगी जी,आपने बिलकुल उचित कहा है इस बार यदि हमने भूल करदी तो फिर पांच-वर्ष और देश का खून चूसकर तो बस.. मरणासन्न ही कर देंगें ……सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई……

Santlal Karun के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय डॉ. रस्तोगी जी, आप की कविता से एक तथ्य यह उभरकर आता है के “सवाल” और “केजरीवाल” दोनों में सामान्य रूप से “वाल” उभयनिष्ठ है ; अर्थात् भ्रष्टाचार के बाद सवाल और सवाल के बाद केजरीवाल का सिलसिला अब थमने वाला नहीं | ऊपर से आप-जैसों का वैचारिक प्रहार अब लगता है भारतीय राजनीति का मुलम्मा उतार कर रहेगा | सार्थक व्यंग्य कविता के लिए हार्दिक साधुवाद !

drvandnasharma के द्वारा
October 13, 2012

सुंदर अभिव्यक्ति , हास्य द्वारा सत्य को ही व्यक्त किया गया है

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 17, 2012

    bhut bhut aabhar

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 12, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति…

October 12, 2012

बाड्रा को आप से अधिक कौन जानता है, आखिर आप के ही शहर से तो रहा है उनका परिवार, बहुत बढिया कविता, बधाई

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    सराहना के लिए हार्दिक आभार ।

deepasingh के द्वारा
October 11, 2012

मनोज जी वन्दे मातरम. बहुत हे अच्छा लेख लिखा हे आपने. मई तो कहूँगी की ये पूरी सरकारही मालामाल हो गई हे. हमारे ब्लॉगपर भी जय. धन्यवाद.

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    हार्दिक आभार ।

sanjay rustagi के द्वारा
October 10, 2012

सुंदर ..अति सुंदर। मनोज जी कर दिया कमाल …. बधाई

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    धन्यवाद

kavya के द्वारा
October 10, 2012

इटली मैया की सब है चाल आम आदमी को करेंगी कंगाल बहुत खूब ! कई दिनों बाद कुछ सार्थक पढ़ा.

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    बहुत बहुत आभार ।

satya sheel agrawal के द्वारा
October 9, 2012

सुन्दर अभिव्यक्ति ,बधाई

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    भाई साहब, आपका बहुत बहुत आभार ।

nishamittal के द्वारा
October 9, 2012

आदरनीय रस्तोगी जी, गेहूं सड़ रहा बोरों में बंद । घर में पड़ रहा है अकाल।। क्यों भर रहे इतनी दौलत । जब इक दिन आना है काल। यदि यही रहस्य इनकी समझ में आ जाता हो तो देश रसातल में न जाता.

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    October 12, 2012

    उत्‍साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार ।


topic of the week



latest from jagran