blogid : 3327 postid : 176

आदमी ही आजकल कमजोर है [भोपाल गैस कांड की बरसी पर ]

Posted On: 4 Dec, 2011 Others,न्यूज़ बर्थ में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सुन रहे यह गैस आदमखोर है ।
हर तरफ बस चीख, दहशत शोर है ।।

बढ रहे हैं जिस सदी की ओर हम ।
यह उसी की चमचमाती भोर है ।।

मौत से क्‍यों इस तरह घबरा रहे ।
जिंदगी तो एक रेशम डोर है ।।

इस तरह मातम मनाते क्‍यों भला ।
देश तो अपना प्रगति की ओर है ।।

मत कहो यह गैस जहरीली बहुत ।
आदमी ही आजकल कमजोर है ।।

डा. मनोज रस्‍तोगी
मुरादाबाद



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (14 votes, average: 4.21 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 24, 2012

ज़िन्दगी तो एक रेशम- डोर है , अच्छी pankti | badhai !!

Jin Amit के द्वारा
February 19, 2012

अरे वाह! बहुत शानदार

ANAND PRAVIN के द्वारा
January 2, 2012

आदमी कमजोर है क्युकी यहाँ, आदमी पे, आदमी का जोर है, और कोई दास्ताँ बचती नहीं, जब देश की सरकार ही कमजोर है I

nishamittal के द्वारा
December 5, 2011

स्वार्थ के इस युग में जनता,बच्चे किसी की जिन्दगी का मोल नहीं है बस पैसा बोलता है.कटु सत्य को बयान करती रचना.

santosh kumar के द्वारा
December 4, 2011

आदरणीय डॉ. साहब ,.बेहतरीन अभिव्यक्ति ,..जहाँ सबकुछ बाजार तय करे ,.पैसे से ही सबकुछ है ,.वहां आदमी ही कमजोर है खता उसी की है


topic of the week



latest from jagran