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अन्ना हजारे के नाम

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पीसीओ के लिए आवेदन पत्र
आमंत्रित हैँ
की जानकारी होते ही
हम भी पहुँच गये
टेलीफोन के दफ्तर
फार्म लेने के लिए
लगी लंबी लाइन देखकर
आने लगे सिर में चक्कर
थोड़ी देर बाद एक कर्मचारी
ने बड़ी शालीनता से पूछा
क्या मैं आपकी सहायता
कर सकता हूं
बीस रुपये का फार्म
मात्र सौ रुपये में अभी
दिला सकता हूँ
मैंने सोचा
सौदा कोई बुरा नहीँ है
लाइन में घंटोँ खड़ा
होने से बच जाउंगा
घर जाकर
चादर तानकर सो जाउंगा
फार्म जमा करने के
कुछ दिन बाद
मैँने फिर लगाया
दफ्तर का चक्कर तो
संबंधित अधिकारी ने
कहा बड़ी गंभीरता से
भाई साहब
यदि आपको
वास्तव में पीसीओ चाहिए
तो दिल्ली जाकर मंत्री जी से
अपने चरित्र का
प्रमाण पत्र ले आइए
अगर आप ऐसा नहीँ कर सकते
तो भी कोई बात नहीँ
आपका काम हो जायेगा
बस डिमांड नोट की राशि मेँ
एक शून्य बढ़ जायेगा
मैँने कहा
यह तो खुलेआम भ्रष्टाचार है
वह आध्यात्मिक मुद्रा मेँ बोले
भाई साहब
इसका तो हर कोई शिकार है
इसके खिलाफ आप कहाँ जायेँगे
जहां जायेँगे इसे पायेँगे
लगता है आप
अखबार नहीं पढ़ते
अन्यथा यह बात नहीं कहते
इस आरोप से तो
मंत्री जी भी नहीं बच सके
तो हम कैसे बच पायेँगे
कुछ दिन तक तो जरूर
आप बौखलायेँगे
फिर लौटकर हमारी ही
शरण मेँ आयेँगे

### डा. मनोज रस्तोगी
मुरादाबाद



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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chandra Bhan Singh के द्वारा
August 21, 2012

हम लोग रिश्वत देकर नोकरों या जिस सरकारी कर्मचारी पास अपना काम करवाने जाते हें तो जल्दी करवाने और जो हम से पहले लाइन में खड़े हो उनसे से पहले करने रिश्वत देकर को भ्रष्ट बनाते हें

करन बहादुर के द्वारा
October 1, 2011

अच्छी रचना है

Krishna Gupta के द्वारा
September 1, 2011

बेहतरीन लेखन के लिए आप बधाई के पत्र हैं | कविता का स्तर भी बहुत खूब है| भ्रष्टाचार पर एक अच्छा कटाक्ष है |

    डॉ,मनोज रस्तोगी के द्वारा
    September 3, 2011

    गुप्ता जी , आपका स्नेह मिलता रहेगा ,इसी आशा के साथ बहुत बहुत आभार .

J L SINGH के द्वारा
April 19, 2011

मान्यवर, सामयिक, सरल, और सुन्दर व्यंग्य रचना के लिए बधाई! कुछ दिन तक तो जरूर आप बौखलायेँगे फिर लौटकर हमारी ही शरण मेँ आयेँगे कटु सत्य और कटाक्ष. आज हम सभी इससे पीड़ित है. जरूरत है हम सबको अपने आपको बदलने की.

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 21, 2011

    बहुत बहुत आभार |

vineetbansal के द्वारा
April 17, 2011

कुछ दिन तक तो जरूर आप बौखलायेँगे फिर लौटकर हमारी ही शरण मेँ आयेँगे हमें यह मिथक तोडना होगा

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 18, 2011

    विनीत जी ,धन्यवाद |

rashid siddiqui के द्वारा
April 17, 2011

डा. साहब आपकी कविता सुंदर है, चुटीली है। आप तो धीर-गंभीर और प्रेमभरी रचनाएं लिखते थे। लगता है अन्ना ने आपके मन मस्ितष्क पर गहरा प्रभाव किया है। वैसे आपना अन्ना जी के बहाने आपने पीसीओ जैसे पुराने जमाने की शराब को नयी बोतल में परोसकर मौके का खूब जाम छलकाया है।  

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 17, 2011

    राशिद जी ,बहती गंगा में कई ………….लोगों ने हाथ धो लिए | मैनें भी सोचा काफी दिन हो गए हैं चलो नहा लिया जाये | प्रेमभरी रचनाएं लिखना तो गुजरे ज़माने की बात हो गई | प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार |

    rashid siddiqui के द्वारा
    April 18, 2011

    डा. साहब आपकी उम्र अब बहती गंगा में हाथ धोने की नहीं है। होमवर्कपूरी तरह निपट जाए तो यही बहुत है और कामयाब इंसान होने की दलील है। अन्ना की आंधी में शामिल होकर भ्रष्टाचारी भी नेक, शरीफ और सदाचारी हो होने का नाटक कर रहे हैं, ऐसे लोगों से सचेत रहने की जरूरत है। 

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 19, 2011

    राशिद जी ,बहती गंगा में हाथ धोने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती | आजकल कामयाब वही है जो नाटकवाज है और मौके का फायदा उठाता है |

    rashid siddiqui के द्वारा
    April 20, 2011

    मनोज जी, अन्ना  का आंदोलन मौका उठाने वालों के खिलाफ ही है। तभी तो कहता हूं कि व्यापारी अनाज में मिलावट बंद करें, दूध का कृत्रिम निर्माण बंद हो। किसान सब्जियों को रंगना बंद करें, लौकी, काशीफल जैसे फलों में इंजेक्शन लगाकर बढ़ा करना बंद करें, फलों में इंजेक्शन लगाकर मिठास नहीं भरी जाए। हैरानी की बात यह है कि सारा हंदुस्तान हजारे के साथ  रिश्वतखोर सरकारी कर्मी और नेताओं के खिलाफ खड़ा हो गया है। आंदोलन में उक्त काले कारनामे करने वाले भी शामिल हैं। मनोज जी, देश को समझाइये, हर तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है। हर देशी के खून में धन कमाने की लालसा बस गई है, तरीके चाहे कोई भी हो।  जन लोकपाल  बिल से नहीं हमें खुद बदलना होगा, तभी देश से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकेगा।

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 21, 2011

    राशिद जी ,मैं आपकी बात से सहमत हूँ |

yogendra verma vyom के द्वारा
April 15, 2011

आदरणीय मनोज जी ने छोटी सी कविता में ही भ्रष्टाचार की समस्या पर करारा कटाक्ष किया है , एक उत्कृष्ट व्यंग्य रचना के लिए अनेकानेक बधाइयाँ. – yogendra verma ‘vyom’

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 16, 2011

    बहुत दिनों के बाद आपके दर्शन हुए | धन्यवाद |

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
April 12, 2011

BAHUT SUNDAR CHITRAN KIYA HAI APNE BADHAI HO MANOJ JI .ACHHA LAGA

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 12, 2011

    मान्यवर ,आपने रचना सराही | इसके लिए आपका आभारी हूँ |

s p singh के द्वारा
April 11, 2011

रस्तोगी जी जहाँ जाईएगा हमें पईएगा ……….. बहुत सुन्दर —-

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 12, 2011

    धन्यवाद ,भाई साहब |

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 10, 2011

    धन्यवाद दिनेश जी ,देखते जाइये आगे आगे होता है क्या | तस्वीर तो बदलेगी ही |

kushwaha के द्वारा
April 8, 2011

अन्ना हजारे हम आपके आमरण अनसन से बहुत खुश है और हम आपके साथ है. ये कमेन्ट हम दोहा कतर से लिख रहे है

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 8, 2011

    कुशवाहा जी, दोहा कतर से अन्ना हजारे को समर्थन देने के लिए बहुत बहुत आभार | हजारे की कोशिश जरूर रंग लाएगी |

    SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
    April 12, 2011

    KRIPAY KATAR MAIN MOUJOOD BHARTIYON KO MERE BLOGE PADHNE KE LIYE PRERIT KAREN DHANYVAD.SORRY MANOJ JI APKE MADHYAM KA SHARA LE RAHA HOON.

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 21, 2011

    भारतीय संस्कृति का जितना प्रसार हो उतना अच्छा |

K M Mishra के द्वारा
April 8, 2011

भ्रष्ट भारत की एक मैली तस्वीर. अन्ना जी को समर्पित इस कविता के लिए आभार. 

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 8, 2011

    मिश्र जी ,आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

shuklabhramar5 के द्वारा
April 7, 2011

भाई साहब इसका तो हर कोई शिकार है इसके खिलाफ आप कहाँ जायेँगे जहां जायेँगे इसे पायेँगे आदरणीय रस्तोगी जी सुन्दर सार्थक रचना जायेंगे कहाँ हम ये साए की तरह हमारा पीछा जो कर रहा कौन सा क्षेत्र अब बचा अब तो शिक्षा , और अनुसासन से भरा तंत्र भी शामिल हर जगह ही तो आदमी है और कुछ आदमी जब आदमी ही नहीं रहे इंसानियत का पाठ ही नहीं पढ़े तो वे कहाँ बिना कान पकडे मानने वाले हैं अब तो जड़ से ही शुरुआत करनी होगी खुद को बदलो घर को बदलो फिर विरोध के स्वर में गीत गाओ अन्ना हजारे का समर्थन जुटाओ बधाई हो

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 8, 2011

    भ्रमर जी ,धन्यवाद | शुरुआत तो हो चुकी है | अब इसे गति देनी है |

alkargupta1 के द्वारा
April 7, 2011

इस भ्रष्टाचार का अंत करने के लिए अन्ना जी के साथ आज देश के हजारों लोग निकल पड़े हैं इन भ्रष्ट नेताओं को जड़ से ही उखाड़ फेंकना है जन शक्ति की ताकत सरकार को समझ आनी चाहिए अब…….दुआ करती हूँ हजारे जी का aandolan सफल हो…….!

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 8, 2011

    अलका जी आपकी दुआ जरूर कुबूल होगी | पूरा विश्वास है कि हम होंगें कामयाब एक दिन |

shakoor khan के द्वारा
April 7, 2011

जय भारत आज हमारे देश का हल देख कर हजारे जी ने जो कदम उथया है हमें उनके साथ आगी बदन है. क्युकी आज भारत तो अपने युवाओ की जरुरत है भार्स्ताचार हम सबी के कारन है हम खुद इसे बड़ा रहे है चाहे रिश्वत दे के या ले के आज पूरी युवा पीढ़ी हजारे जी के साथ है इस देश को बचने के लिए मैं आज हिसार के फवारा चोक पे शांति धरने पे बैठेगे ताकि सर्कार हजारी जी के उठाये कदम को सहयोग दे/ जय भारत जय हिंद आई लव इंडिया

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    धन्यवाद शकूर खान जी , धरने के साथ साथ हमें यह संकल्प भी लेना होगा कि भ्रष्टाचार में हम अपना सहयोग नहीं करेंगे |

Syead Abdullah (Bansi Siddharth Nagar) के द्वारा
April 7, 2011

Ab bharashtchar ke virudh yeh andolan kranti ka roop lega aur is andolan me har tarah ka sahyog dena har desh wasi ka farz hai ab dekhna isko safalta tak le gane me hum kitna yogdan dete hai

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    बंधुवर, कवि त्रिलोचन की रचना है परिवर्तन होते रहते हैं उन्हें न रोक सका है कोई परिवर्तन की शक्ति अतुल है उसे न बांध सका है कोई अन्ना हजारे जी का आन्दोलन एक न एक दिन जरूर रंग लायगा |

vinita shukla के द्वारा
April 7, 2011

देश को दीमक की तरह चाटने वाले, भ्रष्टाचारियों के आचरण पर प्रकाश डालती हुई सार्थक कविता. बधाई.

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    विनीता जी , भ्रष्टाचारियों के खिलाफ हमें आवाज उठानी ही होगी | आपकी बधाई मिली , आभार |

pramod kumar srivastava के द्वारा
April 7, 2011

Lagta hai ki yah ladai shuru ho hi gayi hai, aaj nahi to kal ishe hona hi tha ,chalo aaj hi sahi, hame dekhna hoga ki is ladai me hum shirf jaban aur bayan tak hi shamil na rahen, kyonki hum logon ki aadat hi rahi hai ki nikshedh dooshron ke liye hote hain, bayan bhi dooshraon ke bare me dete hain, amal bhi dooshron se hi karvate hain,aur humare upar koyi niyam,/nished/kanoon lagu nahi hota.

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    प्रमोद जी , मैं आपकी बात से सहमत हूँ | बदलाव की प्रक्रिया हमें खुद से करनी होगी | हम बदलेंगें तो एक न एक दिन युग जरूर बदलेगा | तो शुरू करते आज से ही ,

varish choudhary के द्वारा
April 7, 2011

डॉ. मनोज रस्तोगी साहब आपके एस ब्लोग्स में सचाई तो है लेकिन ये सुब हम लोगो की ही देन है क्युकी भारस्ताचार को बढ़ाने में सुब से बड़ा हाथ पब्लिक का है हर आदमी अपना काम आसानी से करवाना चाहता है उसे तो अपना काम चाहिए छाए उसके लिए उस कितने भी रुपीस देने पड़े वो तो मांगने से पहले ही दावत पानी की बात करता है जब तक हम लोग एक साथ कदम से कदम मिलकर एस भ्रस्ता चार का मुकाबला नही क्र्नेगे तो ये किसी की कोई ताकत नही जो एस को रोक देंगे..क्युकी ये अपनी जुड़ काफी अन्दर तक जमा चुका है. हमे सुब को अन्ना हजारे क साथ मिलकर चलना चैये ताकि एस देश को सोने की गुडिया फिर से बना सके ! जय हिंद जय अन्ना जय भारत

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    वरिश जी ,सही कहा ,हमें एकजुट होना ही होगा |प्रतिक्रिया के लिए आभार |

    Raj के द्वारा
    April 7, 2011

    मेरे भाइयो भ्स्ताचार से लड़ना होगा इसे हटाना होगा इसे रोकना होगा ये तो ५० साल से लोग बोलते आरहे हे पर आज तक कुछ नहीं हुआ कारन केवल एक हे इससे के से लड़ना होगा ये केवल कुछ लोग नहीं तय कर सकते और नहीं कोई इससे एक दिन में या एक साल में ख़तम कर सकता हे मेरा मन्ना हे की जिसतरह से जनसँख्या को बढ़ने से रोका जाता हे उसी तरह से इसे कम और कम और कम कर समाप्त किया जा सकता हे और इसके लिए हर किसी से सलाह लेना होगी और सबसे पहले इसे उपर से कम करना चाहिए ताकि लोगो में ये कहने का बहाना नहीं मिले के बड़े लोगो को तो कोई कुछ नहीं कहता .

    Dr,Manoj Rastogi के द्वारा
    April 7, 2011

    कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि अपने छोटे छोटे सही कामों के लिए सुविधा शुल्क देना बंद कर दें |


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