blogid : 3327 postid : 73

दूध

Posted On: 24 Jan, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

झुर्रीमय चेहरा
जर्जर काया लिए
एक महिला
मंदिर के द्वार की
सीढ़ियोँ पर
बैठी थी
उसका बच्चा
उसके सूखे स्तनोँ को
चूस रहा था
केवल दूध की दो बूंदोँ के लिए
उधर
मंदिर के उस द्वार से
लोग जा रहे थे
महिला का तिरस्कार करते हुए
शिवलिँग पर
दूध अर्पित कर रहे थे
ईश्वर के प्रति
अपार भक्ति दर्शा रहे थे
इंसान को ठुकरा
प्रणाम
भगवान को कर रहे थे

| NEXT



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (23 votes, average: 4.70 out of 5)
Loading ... Loading ...

18 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

baijnathpandey के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय रस्तोगी जी, इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आप प्रसंसा के पात्र है ………..आपकी रचनाएँ सोंचने पर बाध्य करतीं है ……..बार-बार पढने को जी चाहता है

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 9, 2011

    pandey jii, yah mare khushkismiti hae ki aapko mari rachnayen pasand aati haen. silsila jarii rakhiyaga

Himanshu Bansal के द्वारा
February 3, 2011

bahut sundar rachna hai.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 9, 2011

    dhanybad

k saurabh के द्वारा
January 28, 2011

आज के इस युग में आम जन की मानसिकता को दर्शाते हुए आपने आर्यसमाजी चिंतन को प्रदर्शित किया है. वास्तव में महर्षि दयानंद सरस्वती का दर्शन आपकी कविता में है. हम मूलशंकर की इस सोच को लेकर भले ही शास्त्रार्थ करते रहे हों , पर सच्चाई छिपती नहीं है. धन्यवाद.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    सौरभ जी , यह सिलसिला बनायें रखें

J.L. Singh के द्वारा
January 27, 2011

रस्तोगी साहब, आपने तो फिर से निराला जी को याद करा दिया चाट रहे है जूठी पत्तल कभी सडक पर खड़े हुए, और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    भाई साहब , मेरी कोशिश को आपने सराहा ,धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
January 27, 2011

रस्तोगी जी अभिवादन ,ईश्वर की सर्वोत्तम कृति मानव का अपमान कर ,उपेक्षा कर ईश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करने वाला तथाकथित भक्त संभवतः यही सत्य समझ नहीं पाता आपकी कविता अच्छी लगी.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    निशा जी , प्रतिक्रिया के लिए आभार .

deepak के द्वारा
January 27, 2011

मनोज जी काश हम यह समझ पाते सुन्दर रचना के लिए बधाई

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    आभार

Anshu Rastogi के द्वारा
January 25, 2011

Good Poem Congrates

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    अंशु जी धन्यवाद

mithlesh के द्वारा
January 25, 2011

मनोज जी आपकी कविता दिल को छू गयी ।

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    मिथलेश जी ,धन्यवाद

samarth agarwal के द्वारा
January 24, 2011

manoj ji, insan ki seva hi bhagwan ki pooja hai.bahut sundar kavita hai.badhai.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    February 3, 2011

    सही कहा है आपने ,धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran