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दब गयी आवाज,चीखों के बीच

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गोलों के बीच,
तोपों के बीच।
दब गयी आवाज,
चीखों के बीच।।
उड़ रही गंध,
ताजे खून की ।
बरसा रहा जहर,
मानसून भी।।
घुटता है दम ,अब
बारूदी झौकों के बीच।।
फैल गयी काली स्याही,
अब संबंधों पर ।
बारूदी थैले टंग,
गये कंधों पर ।।
अनुबंधों के जले पुलिंदे,
विस्फोटों के बीच।

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Prakash Nautiyal के द्वारा
November 19, 2010

बंधुवर, गीत अच्छा है, जारी रखें। बधाई

    Dr.Manoj Rastogi के द्वारा
    December 28, 2010

    भाई साहब, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

Prakash Nautiyal के द्वारा
November 19, 2010

अच्छा लिख लेते हो, जारी रखें।-बधाई

    Dr.Manoj Rastogi के द्वारा
    December 28, 2010

    धन्यवाद।

harishbhatt के द्वारा
November 7, 2010

बहुत अच्छा. बधाई.

    Dr. Manoj Rastogi के द्वारा
    November 15, 2010

    हरीश जी , आपको गीत पसंद आया, मन को अच्छा लगा। धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 4, 2010

बढ़िया लेख………. हार्दिक बधाई…… आपको और आपके पुरे परिवार को हमारी और से दिवाली की हार्दिक बधाई ……….. ये दिवाली आपके और आपके परिवार को ढेरों खुशियाँ दे…………..

    DR.MANOJ RASTOGI के द्वारा
    November 5, 2010

    आपका बहुत बहुत आभाऱ ।


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