blogid : 3327 postid : 24

जाति में मत बांधों महापुरुषों को

  • SocialTwist Tell-a-Friend

वाल्मीकि जयंती पर शोभायात्रा निकल रही थी । शोभायात्रा मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित था। नतीजतन कार्यालय आने के लिए मैने रिक्शा चौराहा गली की ओर मुड़वा ली। वहां एक महिला से उसका बच्चा शोभायात्रा देखने के लिए जिद कर रहा था और महिला उसे समझा रही थी – देखो, तुम्हें हमने राम जी का जुलूस(राजगद्दी की शोभायात्रा) दिखाया था कि नहीं। अब घर चलो। यह जुलूस उन लोगों का है जो सड़क पर सफाई करते हैं। इन शब्दों ने मेरे मन को झकझोर दिया और मैं पूरे रास्ते यही सोचता रहा कि क्या महर्षि वाल्मीकि किसी जाति विशेष के ही आराध्य हैं? कल्पना कीजिए अगर महर्षि वाल्मीकि न होते तो क्या श्री राम हमारी आस्था के केंद्र होते? क्या आज श्री राम की हिंदू समाज में पूजा होती? क्या जगह- जगह श्री राम मंदिर होते? सवाल उठता है कि जिस महर्षि ने रामायण रच कर श्री रामकथा को जन-जन तक पहुंचाया, वह संपूर्ण हिंदू समाज के आराध्य क्यों नहीं हो सकते? जिस आदिकवि को वेदव्यास, कालिदास,भवभूति,महाकवि भास, रामानुजादि सभी संप्रदायाचार्यों ने श्रद्धापूर्वक स्मरण किया हो। महाकवि तुलसी दास तक ने ‘बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।Ó लिख कर जिनकी वंदना की हो, उस महर्षि को क्यों एक जाति विशेष के दायरे में बांध दिया गया है? जबकि महर्षि ने वाल्मीकि रामायण में स्वयं अपने को प्रचेता का पुत्र कहा है।
वहीं सवाल यह भी उठता है कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर निकलने वाली शोभायात्रा में पूरा हिंदू समाज क्यों नहीं शामिल होता है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को साधुवाद कि उसका आनुषांगिक संगठन सामाजिक समरसता मंच उनकी जयंती पर कार्यक्रम करके सामाजिक भ्रांतियों को दूर करता है। सरस्वती शिशु मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित कर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया जाता है। संस्कार भारती और सेवा भारती भी कार्यक्रमों का आयोजन करती है।
मेरा मानना है कि महर्षि वाल्मीकि ही नहीं किसी भी महापुरुष को हमें जाति के बंधनों में नहीं बांधना चाहिए चाहे वह महाराज चित्रगुप्त, भगवान परशुराम हों, या महात्मा ज्योतिबाफूले,डा. भीमराव अंबेडकर हों या फिर महाराजा हरिश्चंद्र ं,महाराजा अग्रसेन ही क्यों न हों। इस दिशा में इन महापुरुषों के अनुयायियों को भी पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर पहल करनी होगी और कार्यक्रमों में पूरे हिंदू समाज की सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (19 votes, average: 4.74 out of 5)
Loading ... Loading ...

5 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SUBEDAR SURYA DEO के द्वारा
January 26, 2014

AAM AADMI PARTY jo kucch bhi karti hai wo sambidhan sammat hai democracy ka sahi matlab hi yehi hai, Jaab se desh aajad hua hai tab se aab tak desh ke neta ka raaj chal raha Mr Narendra Modi ko sayed pata nahi hai ki desh ki 3-5% aabadi ke dawara 90-95% janta ko rule kiya jaata hai, jish desh ki aabadi ka 5 lakh log TB se mar jay us desh ke liye sab kuchh bekar hai esh desh ke neta ko ARVIND KEJARIWAAL SE SIKSHA LENA CHAHIYEE AUR THORI BHEE INSANIAAT BAACCHI HO TO KEJARIWAL KAA OPPSITION BAND KAR DENA CHAAHIYE

Dr Vishesh Gupta के द्वारा
November 2, 2010

bhai Manoj ji.Congrats for writing such a noble idea.But who is responsible for it.This is man made tradition.It is the time of deep evaluation.We have to come forward for breaking thid isolation.al d best.pl carry on this havit.

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    November 4, 2010

    भाईसाहब,आशा है,कोई तो पहल करेगा ही।किसी को आगे आना ही होगा।

sanjay rustagi के द्वारा
November 1, 2010

उत्तम सर्वोत्तम

    dr.manoj rastogi के द्वारा
    November 4, 2010

    आपका बहुत- बहुत आभार.


topic of the week



latest from jagran